ओ मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो :जानिए , श्री कृष्ण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

श्री कृष्ण जिनका नाम सुनते ही प्रेम की अनुभूति होने लगती हूँ। तभी तो नटखट और शरारती होने के बाद भी सबके लिए मनमोहक थे। यहाँ तक की संसार का एक मात्र चोर जिसका चोरी करने का अंदाज़ भी सबको लुभाता था और संसार जिसे माखनचोर बुलाता था। यशोदा माँ की आँख का तारा, नंदबाबा का राजदुलारा, गोपियों को तंग करता, राधारानी को सताता फिर भी सारा संसार प्रेम उसी को करता था।

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार और हिन्दू धर्म के ईश्वर माने जाते हैं। श्रीकृष्ण बिलकुल अपने नाम की तरह माने जाते है, कृष्ण का अर्थ है अति आकर्षक कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश, लीलाधर, मोहन, देवकीनंदन,नंदनलाल, मनमोहक या द्वारकाधीश आदि नामों से भी उनको जाना जाता हैं। श्रीकृष्ण का जन्म द्वापरयुग में मथुरा के कारागार में हुआ था। उनके पिता का नाम वासुदेव और माता का नाम देवकी।

दोनों को ही कंस ने कारागार में डाल दिया था। दरअसल,उस काल में मथुरा का राजा कंस था, जो श्रीकृष्ण के रिश्ते से मामा लगते थे। कंस को आकाशवाणी द्वारा पता चला कि उसकी मृत्यु उसकी ही बहन देवकी की आठवीं संतान के हाथों होगी। इसी डर के चलते कंस ने अपनी बहन और जीजा को आजीवन कारागार में डाल दिया था।

उत्तरप्रदेश की पश्चिमी सीमा पर स्थित मथुरा भारत का प्राचीन नगर है और भगवान कृष्ण इसके केंद्र बिन्दु है। आपको बता दे, मथुरा के प्राचीन और मशहूर कृष्ण जन्मभूमि मंदिर या कृष्ण जन्मस्थान हिन्दुओं के पूजन के लिए पावन धरती मानी जाती है। मंदिर परिसर के अन्दर एक कारागार जैसी संरचना है और ऐसा माना जाता है कि भगवान का जन्म यहीं हुआ था। कृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा का मुख्य तीर्थ स्थान है। भारत के हर प्राचीन जगह का एक रोचक इतिहास रहा है। तो वहीं मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का भी इतिहास जानने लायक है क्योंकि ये मंदिर भी लगभग 3 बार तोड़ा गया और 4 बार बनवाया गया।

कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का इतिहास –
• कथाओं के अनुसार उनके प्रपौत्र व्रजनाभ ने ही सर्वप्रथम उनकी स्मृति में केशवदेव मंदिर की स्थापना की थी।
• इसके बाद यह मंदिर 80-57 ईसा पूर्व बनाया गया था। इस संबंध में महाक्षत्रप सौदास के समय के एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि किसी ‘वसु’ नामक व्यक्ति ने यह मंदिर बनाया था। इसके बहुत काल के बाद दूसरा मंदिर सन् 800 में विक्रमादित्य के काल में बनवाया गया था, जबकि बौद्ध और जैन धर्म उन्नति कर रहे थे।
• ईस्वी सन् 1017-18 में महमूद गजनवी ने मथुरा के समस्त मंदिर तुड़वा दिए थे, लेकिन उसके लौटते ही मंदिर बन गए। मथुरा के मंदिरों के टूटने और बनने का सिलसिला भी कई बार चला। बाद में मथुरा के राजा विजयपाल के कार्यकाल में एक श्रद्धालु ने मंदिर को नया जीवन प्रदान किया, लेकिन सिकंदर लोदी की बुरी नजर उस पर पड़ी और उसने मंदिर तुड़वा दिया।
• ओरछा के शासक राजा वीरसिंह जू देव बुन्देला ने पुन: इस खंडहर पड़े स्थान पर एक भव्य और पहले की अपेक्षा विशाल मंदिर बनवाया लेकिन इसे भी मुस्लिम शासकों ने सन् 1669 ईस्वी में नष्ट कर इसकी भवन सामग्री से जन्मभूमि के आधे हिस्से पर एक भव्य ईदगाह बनवा दी गई, जो कि आज भी विद्यमान है।
• कई बार बने और टूटे इस मंदिर पर अंतिम प्रहार औरंगजेब ने किया। बहरहाल महामना मदनमोहन मालवीय और जुगलकिशोर बिड़ला के प्रयासों से 1951 में एक ट्रस्ट बनाकर 1953 में मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया। 1958 में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिर का लोकार्पण हुआ। बाद में ट्रस्ट ने औषधालय, विश्रामगृह तथा भागवत भवन का भी निर्माण कराया।

श्रीकृष्ण के इस भव्य एवं दिव्य मंदिर का इतिहास पिछले दो हजार साल में काफी उतार-चढ़ाव का रहा है। इसे कम से कम तीन बार नष्ट किया, लेकिन भक्तों की श्रद्धा एवं विश्वास में कोई कमी नहीं आई। इस मंदिर की भव्यता के बारे में शब्दों या चित्रों से बखान करना नामुमकिन है। आज भी हर साल भारी तादाद में कृष्ण उपासक यहाँ आकर अपने को धन्य महसूस करते हैं और ‘जय कन्हैयालाल की’ का उद्घोष करते हैं।

श्रीकृष्ण का जन्म लेने के पीछे का उद्देश्य-
श्रीकृष्ण के धरती पर अवतार लेने के पीछे का उद्देश्य बुराई को नष्ट करना, पुण्य की रक्षा करना और दृढ़ पैर पर धार्मिकता स्थापित करना था और संसार को प्रेम का सही अर्थ समझाना। मनुष्य रूप में अवतार लेकर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी लीला से सृष्टि का काफी ज्यादा कल्याण किया है। महाभारत युद्ध के रणनीतिकार से लेकर ऐसे अनेकों लीला जो सिर्फ और सिर्फ भगवान कृष्ण ही कर सकते थे। उन्होंने मानव जाति को असाधारण और सोचा पवित्रशास्त्र, भगवता गीता में विचारों को उत्तेजित किया। भागवत गीता इस आधार पर बताती है कि इस धरती पर हमारे जीवन को नियंत्रित करने वाले विभिन्न क्षेत्रों में जीवन का नेतृत्व कैसे किया जाना चाहिए, क्योंकि हमारी आत्मा अमर है।

कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का मनमोहक दृश्य जो सबको मंत्रमुग्ध होने पर मजबूर कर देते है-
कृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर मथुरा का मुख्य तीर्थ स्थान है। पवित्र अभयारण्य का दिव्य वातावरण भक्तों के दिल को जैसे ही वे शुभ स्थान में प्रवेश करते, और दृढ़ता की भावना उनके दिमाग में बढ़ जाती है कि यह वास्तव में वह स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने खुद को प्रकट किया था। परिसर के अंदर एक छोटा तीर्थ मंदिर है जो गहनों से सजे भगवान कृष्ण को समर्पित है। मंदिर परिसर की वास्तुकला हिन्दू अंदाज़ में बनायी गयी है।

मंदिर के भीतर कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को सामने लाते चित्रों समेत भगवान कृष्ण, उनकी प्रेयसी राधा, बलराम, लक्ष्मी-नारायण तथा भगवान जगन्नाथजी जी की बेहद ही अलौकिक प्रतिमा स्थापित की गयी है। यहां पर बड़ा सा शिवलिंग भी है जो की पूर्ण रूप से पारे का बना हुआ है और दिखने में बहुत ही अद्भुत सा लगता है। इनके अलावा एक गहरा सीढ़ीयुक्त पानी का तालाब भी है। सावन के महीने में मथुरा के इस मंदिर में देश के कोने-कोने से आए भक्तों का तांता लग जाता है।

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