भारतीय सेना किसी भी धर्म, जाति, लिंग के आधार पर सैनिकों में नहीं करती भेदभाव- सेना प्रमुख

सेना प्रमुख नरवने ने कहा कि सेना हमेशा लैंगिक समानता के पक्ष में रही है. इसके साथ ही कहा कि भारतीय सेना धर्म, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर किसी भी सैनिक के साथ भेदभाव नहीं करती है.

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (फाइल फोटो)

सेना में महिलाओं अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने स्वागत किया है. सेना प्रमुख नरवने ने कहा कि सेना हमेशा लैंगिक समानता के पक्ष में रही है. इसके साथ ही कहा कि भारतीय सेना धर्म, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर किसी भी सैनिक के साथ भेदभाव नहीं करती है. भारतीय सेना का दृष्टिकोण इस तरह से रहा है और इसीलिए हमने 1993 की शुरुआत में महिला अधिकारियों को शामिल करना शुरू किया.

इसके साथ ही सेना प्रमुख नरवने वने कहा कि मैं यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि महिला अधिकारियों सहित भारतीय सेना में हर किसी को राष्ट्र में योगदान देने का समान अवसर दिया जाएगा. इसके साथ ही उनके करियर में भी प्रगति होगी. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने महिलाओं को हर स्तर पर शामिल करने के लिए पहल की है. और 100 महिला सैनिकों का पहला बैच सैन्य पुलिस केंद्र और स्कूल में प्रशिक्षण ले रहा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया था कि सेना में महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन तथा कमांड में नियुक्ति दी जाए.

सेना प्रमुख ने बताया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंदर 15-20 आतंकवादी शिविर हैं, जहां लगभग 250-350 आतंकवादी हैं और किसी भी समय में आतंकवादियों की संख्या में उतार-चढ़ाव हो सकता है. पाकिस्तान सेना पर कार्रवाई को लेकर कहा कि हमें इनपुट मिलते रहे हैं, हम उन्हें लॉन्च करने में सक्षम होने से पहले ही (पाकिस्तान सेना की) बैट कार्रवाई को विफल करने में सक्षम हैं.

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