IJC में बोले पीएम मोदी, कहा- हर भारतीय की न्यायपालिका पर अगाध आस्था

इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर भारतीय की न्यायपालिका पर अगाध आस्था है. साथ ही इस दशक को बदलावों का दशक बताया. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि वे किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं.

21 फरवरी से शुरू हुए इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस 23 फरवरी तक चलेगा. इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ये कॉन्फ्रेंस 21वीं सदी के तीसरे दशक के शुरुआत में हो रही है. ये दशक भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का है. ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी हर क्षेत्र मोर्चे में होंगे. ये बदलाव तर्क संगत और न्याय संगत होने चाहिए. ये बदलाव सभी के हित में होने चाहिए, भविष्य की जरुरतों को देखते हुए होने चाहिए. इसके लिए ‘ज्यूडिशियल एंड द चेंजिंग वर्ल्ड’ (Judiciary and The Changing World) पर मंथन होनी चाहिए.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी किसी भी न्यायतंत्र की नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र किया है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए बहुत सुखद अवसर भी है कि ये महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस, आज उस कालखंड में हो रही है, जब हमारा देश, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जन्मजयंति मना रहा है. पूज्य बापू का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं. और हमारे बापू खुद भी तो वकील थे, बैरिस्टर थे. अपने जीवन का जो पहला मुकदमा उन्होंने लड़ा, उसके बारे में गांधी जी ने बहुत विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है. गांधी जी तब बंबई, आज के मुंबई में थे. संघर्ष के दिन थे. किसी तरह पहला मुकदमा मिला था लेकिन उन्हें कहा गया कि उस केस के ऐवज में उन्हें किसी को कमीशन देना होगा. गांधी जी ने साफ कह दिया था कि केस मिले या न मिले, कमीशन नहीं दूंगा. सत्य के प्रति, अपने विचारों के प्रति गांधी जी के मन में इतनी स्पष्टता थी. और ये स्पष्टता आई कहां से? उनकी परवरिश, उनके संस्कार और भारतीय दर्शन के निरंतर अध्ययन से ये निकला है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय समाज में Rule of Law सामाजिक संस्कारों का आधार रहा है. हमारे यहां कहा गया है- ‘क्षत्रयस्य क्षत्रम् यत धर्म:’. यानि Law is the King of Kings, Law is supreme. हजारों वर्षों से चले आ रहे ऐसे ही विचार, एक बड़ी वजह हैं कि हर भारतीय की न्यायपालिका पर अगाध आस्था है.

संविधान का जिक्र, करीब 1500 पुराने कानूनों को किया समाप्त
संविधान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी. फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं. लेकिन हुआ क्या? 130 करोड़ भारतवासियों ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया. हजारों वर्षों से, भारत, न्याय के प्रति आस्था के इन्हीं मूल्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है। यही हमारे संविधान की भी प्रेरणा बना है. पिछले वर्ष ही हमारे संविधान को 70 वर्ष पूरे हुए हैं.

संविधान निर्माता डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था-
“Constitution is not a mere lawyer’s document, it is a vehicle of life, and its spirit is always a spirit of age.”

इसी भावना को हमारे देश की अदालतों, हमारे सुप्रीम कोर्ट ने आगे बढ़ाया है. इसी स्पिरिट को हमारी विधानसभा और कार्यपालक ने जीवंत रखा है. एक दूसरे की मर्यादाओं को समझते हुए, तमाम चुनौतियों के बीच कई बार देश के लिए संविधान के तीनों स्तंभ ने उचित रास्ता ढूंढा है. और हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है. बीते पांच वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है.

देश में ऐसे करीब 1500 पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है, जिनकी आज के दौर में प्रासंगिकता समाप्त हो रही थी. और ऐसा नहीं है कि सिर्फ कानून समाप्त करने में तेजी दिखाई गई है. समाज को मजबूती देने वाले नए कानून भी उतनी ही तेजी से बनाए गए हैं. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़ा कानून हो, तीन तलाक के खिलाफ कानून हो या फिर दिव्यांग-जनों के अधिकारों का दायरा बढ़ाने वाला कानून, सरकार ने पूरी संवेदनशीलता से काम किया है.

Gender Just World के तहत महिलाओं की सहभागिता
इस कॉन्फ्रेंस में ‘Gender Just World’ के विषय को भी रखा गया है. दुनिया का कोई भी देश, कोई भी समाज जेंडर जस्टिस के बिना पूर्ण विकास नहीं कर सकता और ना ही न्यायप्रियता का दावा कर सकता है. हमारा संविधान समानता का अधिकार के तहत ही जेंडर जस्टिस को सुनिश्चित करता है. भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से एक है, जिसने स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित किया. आज 70 साल बाद अब चुनाव में महिलाओं की ये सहभागिता अपने सर्वोच्च स्तर पर है.

अब 21वीं सदी का भारत, इस Participation को दूसरे पहलुओं में भी तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे सफल अभियानों के कारण पहली बार भारत के शिक्षण संस्थान में बालिकाओं को का नामांकन, लड़कों से ज्यादा हो गया है. इसी तरह सैन्य सेवा में बेटियों की नियुक्ति हो, फाइटर पाइलट्स की चयन प्रक्रिया हो, माइन्स में रात में काम करने की स्वतंत्रता हो, सरकार द्वारा अनेक बदलाव किए गए हैं. आज भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है जो देश की करियर वूमेन को 26 हफ्ते की ‘ मैटरनिटी पेड लिव’ देता है.

तेजी से विकास और पर्यावरण की रक्षा एक साथ संभव
परिवर्तन के इस दौर में भारत नई ऊंचाई भी हासिल कर रहा है, नई परिभाषाएं गढ़ रहा है और पुरानी अवधारणाओं में बदलाव भी कर रहा है. एक समय था जब कहा जाता था कि तेजी से विकास और पर्यावरण की रक्षा, एक साथ होना संभव नहीं है. भारत ने इस अवधारणा को भी बदला है. आज जहां भारत तेजी से विकास कर रहा है, वहीं हमारा Forest Cover भी तेज़ी से विस्तार हो रहा है. 5-6 साल पहले भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था. 3-4 दिन पहले ही जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक अब भारत विश्व की 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. यानि भारत ने ये करके दिखाया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के साथ-साथ वातावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है.

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता
पीएम मोदी ने भारत की न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की न्यायपालिका ने जिसने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता को समझा है, उसमें निरंतर मार्गदर्शन किया है. अनेक Public Interest Litigations-PILs की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी पर्यावरण से जुड़े मामलों को नए सिरे से परिभाषित किया है.

कोर्ट को e-court Integrated Mission Mode Project से जोड़ा जाए
आपके सामने न्याय के साथ ही, शीघ्र न्याय की भी चुनौती हमेशा से रही है। इसका एक हद तक समाधान टेक्नोलॉजी के पास है. विशेषतौर पर कोर्ट के Procedural Management को लेकर इंटरनेट आधारित टेक्नॉलॉजी से भारत के Justice Delivery System बहुत लाभ होगा. सरकार का भी प्रयास है कि देश की हर कोर्ट को e-court Integrated Mission Mode Project से जोड़ा जाए. National Judicial Data Grid की स्थापना से भी कोर्ट की प्रक्रियाएं आसान बनेंगी.

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर मंथन
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मानवीय विवेक का तालमेल भी भारत में न्यायिक प्रक्रियाओं को और गति देगा. भारत में भी न्यायालयों द्वारा इस पर मंथन किया जा सकता है कि किस क्षेत्र में, किस स्तर पर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता लेनी है. इसके अलावा बदलते हुए समय में डेटा सुरक्षा, साइबर अपराध, जैसे विषय भी अदालतों के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं. इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे अनेक विषयों पर इस कॉन्फ्रेंस में गंभीर मंथन होगा, कुछ सकारात्मक सुझाव सामने आएंगे. इस कॉन्फ्रेंस से भविष्य के लिए अनेक बेहतर समाधान भी निकलेंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close