आरक्षण पर कांग्रेस नेता उदित राज का बयान, कहा- BJP कर रही ‘अपना विकास और सबका विनाश’

डॉ. उदित राज ने कहा कि उच्च न्यायपालिका प्रायः आरक्षण विरोधी फैसले देती रहती है और इस मामले में भी ऐसा ही किया गया. बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने नारा दिया कि 'सबका साथ सबका विकास' लेकिन असल में 'अपना विकास और सबका विनाश' किया. नब्बे प्रतिशत नौकरियां समाप्त करके भारत को इन लोगों ने 'बेरोजगारों का देश' बना दिया।

नई दिल्ली। आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताजा फैसले के आलोक में स्थानीय प्रेस क्लब, नई दिल्ली में आज आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई. मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. उदित राज ने कहा- आरक्षण एवं संविधान बचाने का आन्दोलन अब घर घर तक पहुंचने लगा है। तमाम संगठनों की सहमति से आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति का गठन हुआ है, जिसके द्वारा 22 फरवरी आज को विशाल प्रतिरोध मार्च का आयोजन किया जा रहा है. लोग मंडी हाउस पर प्रातः 11.30 बजे एकत्रित होकर के जंतर-मंतर की ओर मार्च करेंगे.

भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड की सरकार ने 7 फरवरी, 2020 को सुप्रीम कोर्ट में महंगे वकीलों से बहस करायी कि अनुच्छेद 16 और 16 (4) ए, जिनमें आरक्षण का प्रावधान है, मौलिक अधिकार नहीं है. उच्च न्यायपालिका प्रायः आरक्षण विरोधी फैसले देती रहती है और इस मामले में भी ऐसा ही किया गया. संविधान के तीसरे अध्याय में सारे अनुच्छेद मौलिक अधिकार हैं, तो कैसे इसके दो व्याख्यान हो सकते हैं? कुछ को मौलिक अधिकार मान लिया जाय और कुछ को ना माना जाय, प्रथम दृष्टिया में ही यह भेदभाव लगता है यह एक सामान्य आदमी भी समझ सकता है।

डॉ. उदित राज ने कहा कि यह षड्यंत्र भाजपा और संघ का है. शुरू में इन्होने संविधान को मानने से ही मना कर दिया था. 11 दिसंबर, 1949 को सबने ना केवल संविधान को जलाया था बल्कि डॉ. अम्बेडकर का पुतला भी फूंका था. दशकों तक तो इन्होने संविधान को माना ही नहीं, और जब देखा कि देश कि जनता मनुसमृति संविधान वाले प्रस्ताव को नहीं मानेगी तब इन्होंने सत्ता प्राप्त करने के लिए नई चाल चली और संविधान को मानने का ढोंग करने लगे, ताकि सत्ता प्राप्त कर सकें। सत्ता प्राप्त भी कर लिया और अब इनका असली रूप निखरता जा रहा है। 2014 से पिछड़ों-दलितों और आदिवासियों का अधिकार खत्म करना शुरू कर दिया। इन्होने नारा दिया कि ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ लेकिन असल में ‘‘अपना विकास और सबका विनाश’’ किया। नब्बे प्रतिशत नौकरियां समाप्त करके भारत को इन लोगों ने ‘‘बेरोजगारों का देश“ बना दिया।

डॉ. उदित राज ने आगे कहा कि मोहन भागवत एवं मनमोहन वैद्य पहले ही कह चुके हैं कि आरक्षण समाप्त होना चाहिए और उसी को उत्तराखंड कि सरकार लागू कर रही है। उच्च न्यायपालिका में गरीब, दलित, पिछड़ों के हितों और आदिवासियों के खिलाफ वाली मानसिकता के लोग बैठे हैं और कानून का गलत व्याख्यान करके पिछड़े वर्गों के अधिकार को समाप्त करते जा रहे हैं। हम 22 फरवरी, 2020 के प्रतिरोध मार्च, 11:30 बजे मंडी हाउस पर एकत्रित होकर जंतर मंतर कि ओर प्रस्थान करेंगे। हमारी मांग है कि फौरन 7 फरवरी का आरक्षण विरोधी आदेश निरस्त किया जाए, आरक्षण कि नौवीं सूची में रखा जाय और उच्च न्यायपालिका में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं कि भागीदारी सुनिश्चित की जाए.

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