शाहीन बाग: प्रदर्शनकारियों और वार्ताकारों के बीच बातचीत का चौथा दिन भी रहा बेनतीजा

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों और वार्ताकारों के बीच लगातार तीन दिनों से बातचीत का दौर जारी है. वहीं आज बातचीत के चौथे दिन भी कोई नतीजा नहीं निकला है. आज चौथे दिन बातचीत के लिए वार्ताकार साधना रामचंद्रन शाहीन बाग पहुंची थी.

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों और वार्ताकारों के बीच बातचीत जारी है. तीन दिन बातचीत चलने के बाद भी अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. तीन दिन बाद आज चौथे दिन शनिवार को भी वार्ताकार साधना रामचंद्रन शाहीन बाग पहुंची. जहां वे एकबार फिर धरने पर बैठी महिलाओं से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मामले का हल नहीं निकला और बात बेनतीजा ही रही.

शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए शनिवार को साधना रामचंद्रन ने कहा कि, ‘मैंने कभी नहीं कहा कि आप पार्क में चले जाइए. मैं तो आगे के लिए कह रही थी, शाहीन बाग में एक बहुत खूबसूरत बाग बनना चाहिए, जिस पर हर हिन्दुस्तानी का हक होना चाहिए कि वो आकर आंदोलन कर सके. इस आइडिया पर प्रदर्शन कर रही सारी महिलाओं ने साफ मना कर दिया. बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं ने वार्ताकार साधना रामचंद्रन के सामने कुछ मांगें रखीं.

  • प्रदर्शनकारी सुरक्षा चाहते हैं और वे चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट भी इस पर एक आदेश जारी करे.
  • प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि शाहीन बाग और जामिया के लोगों के खिलाफ मुकदमे वापस लिए जाएं.
  • शाहीन बाग में एक दादी ने कहा कि जब CAA वापस लेंगे तो रोड खाली होगा नहीं तो नहीं होगा.
  • एक दूसरी महिला ने कहा कि अगर आधी सड़क खुलती है तो सुरक्षा और अलुमिनियम शीट चाहिए.
  • प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की पुलिस नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदारी ले.
  • स्मृति ईरानी ने हम (प्रदर्शनकारी महिलाएं) पर टिप्पणी की कि ‘शाहीन बाग की महिलाएं बातचीत के लायक नहीं हैं’.
  • जिन लोगों ने शाहीन बाग के खिलाफ गलत बोला है उनके खिलाफ कार्यवाही हो.

इससे पहले शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने वार्ताकारों से शुक्रवार को कहा था कि अगर दिल्ली पुलिस ​सुरक्षा दे तो वह रास्ता खोलने को तैयार है. दिल्ली पुलिस लिखि​त में आश्वासन दे. सुरक्षा को लेकर हमें भरोसा नहीं है. कुछ भी घटना होती है तो पुलिस कमिश्नर से लेकर बीट कॉन्स्टेबल को जिम्मेदार माना जाए और बर्खास्त किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने वार्ताकारों को इस मामले में 24 फरवरी तक रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिया है. अब केवल वार्ताकारों के पास दो ही दिन बचे है. यदि अगले दो दिन में कोई सहमति नहीं बनती है तो अगली सुनवाई में इस पर कोई फैसला हेागा.

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